Book 7 • Chapter 34
Section 34
8 verses
Verse 1
सुनि प्रभु बचन हरषि मुनि चारी पुलकित तन अस्तुति अनुसारी
Verse 2
जय भगवंत अनंत अनामय अनघ अनेक एक करुनामय
Verse 3
जय निर्गुन जय जय गुन सागर सुख मंदिर सुंदर अति नागर
Verse 4
जय इंदिरा रमन जय भूधर अनुपम अज अनादि सोभाकर
Verse 5
ग्यान निधान अमान मानप्रद पावन सुजस पुरान बेद बद
Verse 6
तग्य कृतग्य अग्यता भंजन नाम अनेक अनाम निरंजन
Verse 7
सर्ब सर्बगत सर्ब उरालय बससि सदा हम कहुँ परिपालय
Verse 8
द्वंद बिपति भव फंद बिभंजय ह्रदि बसि राम काम मद गंजय
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