Book 7 • Chapter 33
Section 33
8 verses
Verse 1
कीन्ह दंडवत तीनिउँ भाई सहित पवनसुत सुख अधिकाई
Verse 2
मुनि रघुपति छबि अतुल बिलोकी भए मगन मन सके न रोकी
Verse 3
स्यामल गात सरोरुह लोचन सुंदरता मंदिर भव मोचन
Verse 4
एकटक रहे निमेष न लावहिं प्रभु कर जोरें सीस नवावहिं
Verse 5
तिन्ह कै दसा देखि रघुबीरा स्त्रवत नयन जल पुलक सरीरा
Verse 6
कर गहि प्रभु मुनिबर बैठारे परम मनोहर बचन उचारे
Verse 7
आजु धन्य मैं सुनहु मुनीसा तुम्हरें दरस जाहिं अघ खीसा
Verse 8
बड़े भाग पाइब सतसंगा बिनहिं प्रयास होहिं भव भंगा
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