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Ramayana Singer

श्रीमद्वाल्मीकीयरामायणम्

Book 7 • Chapter 37

Section 37

8 verses

Verse 1
करउँ कृपानिधि एक ढिठाई मैं सेवक तुम्ह जन सुखदाई
Verse 2
संतन्ह कै महिमा रघुराई बहु बिधि बेद पुरानन्ह गाई
Verse 3
श्रीमुख तुम्ह पुनि कीन्हि बड़ाई तिन्ह पर प्रभुहि प्रीति अधिकाई
Verse 4
सुना चहउँ प्रभु तिन्ह कर लच्छन कृपासिंधु गुन ग्यान बिचच्छन
Verse 5
संत असंत भेद बिलगाई प्रनतपाल मोहि कहहु बुझाई
Verse 6
संतन्ह के लच्छन सुनु भ्राता अगनित श्रुति पुरान बिख्याता
Verse 7
संत असंतन्हि कै असि करनी जिमि कुठार चंदन आचरनी
Verse 8
काटइ परसु मलय सुनु भाई निज गुन देइ सुगंध बसाई
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