Book 7 • Chapter 40
Section 40
8 verses
Verse 1
लोभइ ओढ़न लोभइ डासन सिस्त्रोदर पर जमपुर त्रास न
Verse 2
काहू की जौं सुनहिं बड़ाई स्वास लेहिं जनु जूड़ी आई
Verse 3
जब काहू कै देखहिं बिपती सुखी भए मानहुँ जग नृपती
Verse 4
स्वारथ रत परिवार बिरोधी लंपट काम लोभ अति क्रोधी
Verse 5
मातु पिता गुर बिप्र न मानहिं आपु गए अरु घालहिं आनहिं
Verse 6
करहिं मोह बस द्रोह परावा संत संग हरि कथा न भावा
Verse 7
अवगुन सिंधु मंदमति कामी बेद बिदूषक परधन स्वामी
Verse 8
बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा दंभ कपट जियँ धरें सुबेषा
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