Book 7 • Chapter 41
Section 41
8 verses
Verse 1
पर हित सरिस धर्म नहिं भाई पर पीड़ा सम नहिं अधमाई
Verse 2
निर्नय सकल पुरान बेद कर कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर
Verse 3
नर सरीर धरि जे पर पीरा करहिं ते सहहिं महा भव भीरा
Verse 4
करहिं मोह बस नर अघ नाना स्वारथ रत परलोक नसाना
Verse 5
कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता सुभ अरु असुभ कर्म फल दाता
Verse 6
अस बिचारि जे परम सयाने भजहिं मोहि संसृत दुख जाने
Verse 7
त्यागहिं कर्म सुभासुभ दायक भजहिं मोहि सुर नर मुनि नायक
Verse 8
संत असंतन्ह के गुन भाषे ते न परहिं भव जिन्ह लखि राखे
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