Book 7 • Chapter 47
Section 47
8 verses
Verse 1
सुनत सुधासम बचन राम के गहे सबनि पद कृपाधाम के
Verse 2
जननि जनक गुर बंधु हमारे कृपा निधान प्रान ते प्यारे
Verse 3
तनु धनु धाम राम हितकारी सब बिधि तुम्ह प्रनतारति हारी
Verse 4
असि सिख तुम्ह बिनु देइ न कोऊ मातु पिता स्वारथ रत ओऊ
Verse 5
हेतु रहित जग जुग उपकारी तुम्ह तुम्हार सेवक असुरारी
Verse 6
स्वारथ मीत सकल जग माहीं सपनेहुँ प्रभु परमारथ नाहीं
Verse 7
सबके बचन प्रेम रस साने सुनि रघुनाथ हृदयँ हरषाने
Verse 8
निज निज गृह गए आयसु पाई बरनत प्रभु बतकही सुहाई
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