Book 7 • Chapter 49
Section 49
8 verses
Verse 1
जप तप नियम जोग निज धर्मा श्रुति संभव नाना सुभ कर्मा
Verse 2
ग्यान दया दम तीरथ मज्जन जहँ लगि धर्म कहत श्रुति सज्जन
Verse 3
आगम निगम पुरान अनेका पढ़े सुने कर फल प्रभु एका
Verse 4
तब पद पंकज प्रीति निरंतर सब साधन कर यह फल सुंदर
Verse 5
छूटइ मल कि मलहि के धोएँ घृत कि पाव कोइ बारि बिलोएँ
Verse 6
प्रेम भगति जल बिनु रघुराई अभिअंतर मल कबहुँ न जाई
Verse 7
सोइ सर्बग्य तग्य सोइ पंडित सोइ गुन गृह बिग्यान अखंडित
Verse 8
दच्छ सकल लच्छन जुत सोई जाकें पद सरोज रति होई
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