Book 7 • Chapter 5
Section 5
8 verses
Verse 1
आए भरत संग सब लोगा कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा
Verse 2
बामदेव बसिष्ठ मुनिनायक देखे प्रभु महि धरि धनु सायक
Verse 3
धाइ धरे गुर चरन सरोरुह अनुज सहित अति पुलक तनोरुह
Verse 4
भेंटि कुसल बूझी मुनिराया हमरें कुसल तुम्हारिहिं दाया
Verse 5
सकल द्विजन्ह मिलि नायउ माथा धर्म धुरंधर रघुकुलनाथा
Verse 6
गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज नमत जिन्हहि सुर मुनि संकर अज
Verse 7
परे भूमि नहिं उठत उठाए बर करि कृपासिंधु उर लाए
Verse 8
स्यामल गात रोम भए ठाढ़े नव राजीव नयन जल बाढ़े
0:000:00
Speed: