Book 7 • Chapter 6
Section 6
9 verses
Verse 1
भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे दुसह बिरह संभव दुख मेटे
Verse 2
सीता चरन भरत सिरु नावा अनुज समेत परम सुख पावा
Verse 3
प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी जनित बियोग बिपति सब नासी
Verse 4
प्रेमातुर सब लोग निहारी कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी
Verse 5
अमित रूप प्रगटे तेहि काला जथाजोग मिले सबहि कृपाला
Verse 6
कृपादृष्टि रघुबीर बिलोकी किए सकल नर नारि बिसोकी
Verse 7
छन महिं सबहि मिले भगवाना उमा मरम यह काहुँ न जाना
Verse 8
एहि बिधि सबहि सुखी करि रामा आगें चले सील गुन धामा
Verse 9
कौसल्यादि मातु सब धाई निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई
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