Book 7 • Chapter 59
Section 59
8 verses
Verse 1
नाना भाँति मनहि समुझावा प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा
Verse 2
खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई
Verse 3
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं कहेसि जो संसय निज मन माहीं
Verse 4
सुनि नारदहि लागि अति दाया सुनु खग प्रबल राम कै माया
Verse 5
जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई बरिआई बिमोह मन करई
Verse 6
जेहिं बहु बार नचावा मोही सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही
Verse 7
महामोह उपजा उर तोरें मिटिहि न बेगि कहें खग मोरें
Verse 8
चतुरानन पहिं जाहु खगेसा सोइ करेहु जेहि होइ निदेसा
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