Book 7 • Chapter 58
Section 58
8 verses
Verse 1
गिरिजा कहेउँ सो सब इतिहासा मैं जेहि समय गयउँ खग पासा
Verse 2
अब सो कथा सुनहु जेही हेतू गयउ काग पहिं खग कुल केतू
Verse 3
जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा
Verse 4
इंद्रजीत कर आपु बँधायो तब नारद मुनि गरुड़ पठायो
Verse 5
बंधन काटि गयो उरगादा उपजा हृदयँ प्रचंड बिषादा
Verse 6
प्रभु बंधन समुझत बहु भाँती करत बिचार उरग आराती
Verse 7
ब्यापक ब्रह्म बिरज बागीसा माया मोह पार परमीसा
Verse 8
सो अवतार सुनेउँ जग माहीं देखेउँ सो प्रभाव कछु नाहीं
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