Book 7 • Chapter 61
Section 61
8 verses
Verse 1
तेहिं मम पद सादर सिरु नावा पुनि आपन संदेह सुनावा
Verse 2
सुनि ता करि बिनती मृदु बानी परेम सहित मैं कहेउँ भवानी
Verse 3
मिलेहु गरुड़ मारग महँ मोही कवन भाँति समुझावौं तोही
Verse 4
तबहि होइ सब संसय भंगा जब बहु काल करिअ सतसंगा
Verse 5
सुनिअ तहाँ हरि कथा सुहाई नाना भाँति मुनिन्ह जो गाई
Verse 6
जेहि महुँ आदि मध्य अवसाना प्रभु प्रतिपाद्य राम भगवाना
Verse 7
नित हरि कथा होत जहँ भाई पठवउँ तहाँ सुनहि तुम्ह जाई
Verse 8
जाइहि सुनत सकल संदेहा राम चरन होइहि अति नेहा
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