Book 7 • Chapter 79
Section 79
8 verses
Verse 1
ऐसेहिं हरि बिनु भजन खगेसा मिटइ न जीवन्ह केर कलेसा
Verse 2
हरि सेवकहि न ब्याप अबिद्या प्रभु प्रेरित ब्यापइ तेहि बिद्या
Verse 3
ताते नास न होइ दास कर भेद भगति भाढ़इ बिहंगबर
Verse 4
भ्रम ते चकित राम मोहि देखा बिहँसे सो सुनु चरित बिसेषा
Verse 5
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ जाना अनुज न मातु पिताहूँ
Verse 6
जानु पानि धाए मोहि धरना स्यामल गात अरुन कर चरना
Verse 7
तब मैं भागि चलेउँ उरगामी राम गहन कहँ भुजा पसारी
Verse 8
जिमि जिमि दूरि उड़ाउँ अकासा तहँ भुज हरि देखउँ निज पासा
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