Book 7 • Chapter 80
Section 80
8 verses
Verse 1
मूदेउँ नयन त्रसित जब भयउँ पुनि चितवत कोसलपुर गयऊँ
Verse 2
मोहि बिलोकि राम मुसुकाहीं बिहँसत तुरत गयउँ मुख माहीं
Verse 3
उदर माझ सुनु अंडज राया देखेउँ बहु ब्रह्मांड निकाया
Verse 4
अति बिचित्र तहँ लोक अनेका रचना अधिक एक ते एका
Verse 5
कोटिन्ह चतुरानन गौरीसा अगनित उडगन रबि रजनीसा
Verse 6
अगनित लोकपाल जम काला अगनित भूधर भूमि बिसाला
Verse 7
सागर सरि सर बिपिन अपारा नाना भाँति सृष्टि बिस्तारा
Verse 8
सुर मुनि सिद्ध नाग नर किंनर चारि प्रकार जीव सचराचर
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