Book 7 • Chapter 83
Section 83
8 verses
Verse 1
देखि चरित यह सो प्रभुताई समुझत देह दसा बिसराई
Verse 2
धरनि परेउँ मुख आव न बाता त्राहि त्राहि आरत जन त्राता
Verse 3
प्रेमाकुल प्रभु मोहि बिलोकी निज माया प्रभुता तब रोकी
Verse 4
कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ दीनदयाल सकल दुख हरेऊ
Verse 5
कीन्ह राम मोहि बिगत बिमोहा सेवक सुखद कृपा संदोहा
Verse 6
प्रभुता प्रथम बिचारि बिचारी मन महँ होइ हरष अति भारी
Verse 7
भगत बछलता प्रभु कै देखी उपजी मम उर प्रीति बिसेषी
Verse 8
सजल नयन पुलकित कर जोरी कीन्हिउँ बहु बिधि बिनय बहोरी
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