Book 7 • Chapter 9
Section 9
9 verses
Verse 1
कंचन कलस बिचित्र सँवारे सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे
Verse 2
बंदनवार पताका केतू सबन्हि बनाए मंगल हेतू
Verse 3
बीथीं सकल सुगंध सिंचाई गजमनि रचि बहु चौक पुराई
Verse 4
नाना भाँति सुमंगल साजे हरषि नगर निसान बहु बाजे
Verse 5
जहँ तहँ नारि निछावर करहीं देहिं असीस हरष उर भरहीं
Verse 6
कंचन थार आरती नाना जुबती सजें करहिं सुभ गाना
Verse 7
करहिं आरती आरतिहर कें रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें
Verse 8
पुर सोभा संपति कल्याना निगम सेष सारदा बखाना
Verse 9
तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं उमा तासु गुन नर किमि कहहीं
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