Book 3 • Chapter 20
Section 20
29 verses
Verse 1
तब चले जान बबान कराल फुंकरत जनु बहु ब्याल
Verse 2
कोपेउ समर श्रीराम चले बिसिख निसित निकाम
Verse 3
अवलोकि खरतर तीर मुरि चले निसिचर बीर
Verse 4
भए क्रुद्ध तीनिउ भाइ जो भागि रन ते जाइ
Verse 5
तेहि बधब हम निज पानि फिरे मरन मन महुँ ठानि
Verse 6
आयुध अनेक प्रकार सनमुख ते करहिं प्रहार
Verse 7
रिपु परम कोपे जानि प्रभु धनुष सर संधानि
Verse 8
छाँड़े बिपुल नाराच लगे कटन बिकट पिसाच
Verse 9
उर सीस भुज कर चरन जहँ तहँ लगे महि परन
Verse 10
चिक्करत लागत बान धर परत कुधर समान
Verse 11
भट कटत तन सत खंड पुनि उठत करि पाषंड
Verse 12
नभ उड़त बहु भुज मुंड बिनु मौलि धावत रुंड
Verse 13
खग कंक काक सृगाल कटकटहिं कठिन कराल
Verse 14
कटकटहिं ज़ंबुक भूत प्रेत पिसाच खर्पर संचहीं
Verse 15
बेताल बीर कपाल ताल बजाइ जोगिनि नंचहीं
Verse 16
रघुबीर बान प्रचंड खंडहिं भटन्ह के उर भुज सिरा
Verse 17
जहँ तहँ परहिं उठि लरहिं धर धरु धरु करहिं भयकर गिरा
Verse 18
अंतावरीं गहि उड़त गीध पिसाच कर गहि धावहीं
Verse 19
संग्राम पुर बासी मनहुँ बहु बाल गुड़ी उड़ावहीं
Verse 20
मारे पछारे उर बिदारे बिपुल भट कहँरत परे
Verse 21
अवलोकि निज दल बिकल भट तिसिरादि खर दूषन फिरे
Verse 22
सर सक्ति तोमर परसु सूल कृपान एकहि बारहीं
Verse 23
करि कोप श्रीरघुबीर पर अगनित निसाचर डारहीं
Verse 24
प्रभु निमिष महुँ रिपु सर निवारि पचारि डारे सायका
Verse 25
दस दस बिसिख उर माझ मारे सकल निसिचर नायका
Verse 26
महि परत उठि भट भिरत मरत न करत माया अति घनी
Verse 27
सुर डरत चौदह सहस प्रेत बिलोकि एक अवध धनी
Verse 28
सुर मुनि सभय प्रभु देखि मायानाथ अति कौतुक कर् यो
Verse 29
देखहि परसपर राम करि संग्राम रिपुदल लरि मर् यो
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