Book 3 • Chapter 22
Section 22
14 verses
Verse 1
सुनत सभासद उठे अकुलाई समुझाई गहि बाहँ उठाई
Verse 2
कह लंकेस कहसि निज बाता केंइँ तव नासा कान निपाता
Verse 3
अवध नृपति दसरथ के जाए पुरुष सिंघ बन खेलन आए
Verse 4
समुझि परी मोहि उन्ह कै करनी रहित निसाचर करिहहिं धरनी
Verse 5
जिन्ह कर भुजबल पाइ दसानन अभय भए बिचरत मुनि कानन
Verse 6
देखत बालक काल समाना परम धीर धन्वी गुन नाना
Verse 7
अतुलित बल प्रताप द्वौ भ्राता खल बध रत सुर मुनि सुखदाता
Verse 8
सोभाधाम राम अस नामा तिन्ह के संग नारि एक स्यामा
Verse 9
रुप रासि बिधि नारि सँवारी रति सत कोटि तासु बलिहारी
Verse 10
तासु अनुज काटे श्रुति नासा सुनि तव भगिनि करहिं परिहासा
Verse 11
खर दूषन सुनि लगे पुकारा छन महुँ सकल कटक उन्ह मारा
Verse 12
खर दूषन तिसिरा कर घाता सुनि दससीस जरे सब गाता
Verse 13
सुपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति
Verse 14
गयउ भवन अति सोचबस नीद परइ नहिं राति
0:000:00
Speed: