Book 3 • Chapter 23
Section 23
10 verses
Verse 1
सुर नर असुर नाग खग माहीं मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीं
Verse 2
खर दूषन मोहि सम बलवंता तिन्हहि को मारइ बिनु भगवंता
Verse 3
सुर रंजन भंजन महि भारा जौं भगवंत लीन्ह अवतारा
Verse 4
तौ मै जाइ बैरु हठि करऊँ प्रभु सर प्रान तजें भव तरऊँ
Verse 5
होइहि भजनु न तामस देहा मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा
Verse 6
जौं नररुप भूपसुत कोऊ हरिहउँ नारि जीति रन दोऊ
Verse 7
चला अकेल जान चढि तहवाँ बस मारीच सिंधु तट जहवाँ
Verse 8
इहाँ राम जसि जुगुति बनाई सुनहु उमा सो कथा सुहाई
Verse 9
लछिमन गए बनहिं जब लेन मूल फल कंद
Verse 10
जनकसुता सन बोले बिहसि कृपा सुख बृंद
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