Book 3 • Chapter 25
Section 25
10 verses
Verse 1
दसमुख सकल कथा तेहि आगें कही सहित अभिमान अभागें
Verse 2
होहु कपट मृग तुम्ह छलकारी जेहि बिधि हरि आनौ नृपनारी
Verse 3
तेहिं पुनि कहा सुनहु दससीसा ते नररुप चराचर ईसा
Verse 4
तासों तात बयरु नहिं कीजे मारें मरिअ जिआएँ जीजै
Verse 5
मुनि मख राखन गयउ कुमारा बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा
Verse 6
सत जोजन आयउँ छन माहीं तिन्ह सन बयरु किएँ भल नाहीं
Verse 7
भइ मम कीट भृंग की नाई जहँ तहँ मैं देखउँ दोउ भाई
Verse 8
जौं नर तात तदपि अति सूरा तिन्हहि बिरोधि न आइहि पूरा
Verse 9
जेहिं ताड़का सुबाहु हति खंडेउ हर कोदंड
Verse 10
खर दूषन तिसिरा बधेउ मनुज कि अस बरिबंड
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