Book 3 • Chapter 35
Section 35
10 verses
Verse 1
पानि जोरि आगें भइ ठाढ़ी प्रभुहि बिलोकि प्रीति अति बाढ़ी
Verse 2
केहि बिधि अस्तुति करौ तुम्हारी अधम जाति मैं जड़मति भारी
Verse 3
अधम ते अधम अधम अति नारी तिन्ह महँ मैं मतिमंद अघारी
Verse 4
कह रघुपति सुनु भामिनि बाता मानउँ एक भगति कर नाता
Verse 5
जाति पाँति कुल धर्म बड़ाई धन बल परिजन गुन चतुराई
Verse 6
भगति हीन नर सोहइ कैसा बिनु जल बारिद देखिअ जैसा
Verse 7
नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं सावधान सुनु धरु मन माहीं
Verse 8
प्रथम भगति संतन्ह कर संगा दूसरि रति मम कथा प्रसंगा
Verse 9
गुर पद पंकज सेवा तीसरि भगति अमान
Verse 10
चौथि भगति मम गुन गन करइ कपट तजि गान
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