Book 3 • Chapter 38
Section 38
16 verses
Verse 1
बिटप बिसाल लता अरुझानी बिबिध बितान दिए जनु तानी
Verse 2
कदलि ताल बर धुजा पताका दैखि न मोह धीर मन जाका
Verse 3
बिबिध भाँति फूले तरु नाना जनु बानैत बने बहु बाना
Verse 4
कहुँ कहुँ सुन्दर बिटप सुहाए जनु भट बिलग बिलग होइ छाए
Verse 5
कूजत पिक मानहुँ गज माते ढेक महोख ऊँट बिसराते
Verse 6
मोर चकोर कीर बर बाजी पारावत मराल सब ताजी
Verse 7
तीतिर लावक पदचर जूथा बरनि न जाइ मनोज बरुथा
Verse 8
रथ गिरि सिला दुंदुभी झरना चातक बंदी गुन गन बरना
Verse 9
मधुकर मुखर भेरि सहनाई त्रिबिध बयारि बसीठीं आई
Verse 10
चतुरंगिनी सेन सँग लीन्हें बिचरत सबहि चुनौती दीन्हें
Verse 11
लछिमन देखत काम अनीका रहहिं धीर तिन्ह कै जग लीका
Verse 12
एहि कें एक परम बल नारी तेहि तें उबर सुभट सोइ भारी
Verse 13
तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ
Verse 14
मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ 38(क)
Verse 15
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि
Verse 16
क्रोध के परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि 38(ख)
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