Book 3 • Chapter 39
Section 39
12 verses
Verse 1
गुनातीत सचराचर स्वामी राम उमा सब अंतरजामी
Verse 2
कामिन्ह कै दीनता देखाई धीरन्ह कें मन बिरति दृढ़ाई
Verse 3
क्रोध मनोज लोभ मद माया छूटहिं सकल राम कीं दाया
Verse 4
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला जा पर होइ सो नट अनुकूला
Verse 5
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना सत हरि भजनु जगत सब सपना
Verse 6
पुनि प्रभु गए सरोबर तीरा पंपा नाम सुभग गंभीरा
Verse 7
संत हृदय जस निर्मल बारी बाँधे घाट मनोहर चारी
Verse 8
जहँ तहँ पिअहिं बिबिध मृग नीरा जनु उदार गृह जाचक भीरा
Verse 9
पुरइनि सबन ओट जल बेगि न पाइअ मर्म
Verse 10
मायाछन्न न देखिऐ जैसे निर्गुन ब्रह्म 39(क)
Verse 11
सुखि मीन सब एकरस अति अगाध जल माहिं
Verse 12
जथा धर्मसीलन्ह के दिन सुख संजुत जाहिं 39(ख)
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