Book 2 • Chapter 119
Section 119
8 verses
Verse 1
फिरत नारि नर अति पछिताहीं देअहि दोषु देहिं मन माहीं
Verse 2
सहित बिषाद परसपर कहहीं बिधि करतब उलटे सब अहहीं
Verse 3
निपट निरंकुस निठुर निसंकू जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू
Verse 4
रूख कलपतरु सागरु खारा तेहिं पठए बन राजकुमारा
Verse 5
जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू
Verse 6
ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना रचे बादि बिधि बाहन नाना
Verse 7
ए महि परहिं डासि कुस पाता सुभग सेज कत सृजत बिधाता
Verse 8
तरुबर बास इन्हहि बिधि दीन्हा धवल धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा
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