Book 2 • Chapter 120
Section 120
10 verses
Verse 1
जौं ए कंद मूल फल खाहीं बादि सुधादि असन जग माहीं
Verse 2
एक कहहिं ए सहज सुहाए आपु प्रगट भए बिधि न बनाए
Verse 3
जहँ लगि बेद कही बिधि करनी श्रवन नयन मन गोचर बरनी
Verse 4
देखहु खोजि भुअन दस चारी कहँ अस पुरुष कहाँ असि नारी
Verse 5
इन्हहि देखि बिधि मनु अनुरागा पटतर जोग बनावै लागा
Verse 6
कीन्ह बहुत श्रम ऐक न आए तेहिं इरिषा बन आनि दुराए
Verse 7
एक कहहिं हम बहुत न जानहिं आपुहि परम धन्य करि मानहिं
Verse 8
ते पुनि पुन्यपुंज हम लेखे जे देखहिं देखिहहिं जिन्ह देखे
Verse 9
एहि बिधि कहि कहि बचन प्रिय लेहिं नयन भरि नीर
Verse 10
किमि चलिहहि मारग अगम सुठि सुकुमार सरीर
0:000:00
Speed: