Book 2 • Chapter 122
Section 122
10 verses
Verse 1
गाँव गाँव अस होइ अनंदू देखि भानुकुल कैरव चंदू
Verse 2
जे कछु समाचार सुनि पावहिं ते नृप रानिहि दोसु लगावहिं
Verse 3
कहहिं एक अति भल नरनाहू दीन्ह हमहि जोइ लोचन लाहू
Verse 4
कहहिं परस्पर लोग लोगाईं बातें सरल सनेह सुहाईं
Verse 5
ते पितु मातु धन्य जिन्ह जाए धन्य सो नगरु जहाँ तें आए
Verse 6
धन्य सो देसु सैलु बन गाऊँ जहँ जहँ जाहिं धन्य सोइ ठाऊँ
Verse 7
सुख पायउ बिरंचि रचि तेही ए जेहि के सब भाँति सनेही
Verse 8
राम लखन पथि कथा सुहाई रही सकल मग कानन छाई
Verse 9
एहि बिधि रघुकुल कमल रबि मग लोगन्ह सुख देत
Verse 10
जाहिं चले देखत बिपिन सिय सौमित्रि समेत
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