Book 2 • Chapter 129
Section 129
8 verses
Verse 1
प्रभु प्रसाद सुचि सुभग सुबासा सादर जासु लहइ नित नासा
Verse 2
तुम्हहि निबेदित भोजन करहीं प्रभु प्रसाद पट भूषन धरहीं
Verse 3
सीस नवहिं सुर गुरु द्विज देखी प्रीति सहित करि बिनय बिसेषी
Verse 4
कर नित करहिं राम पद पूजा राम भरोस हृदयँ नहि दूजा
Verse 5
चरन राम तीरथ चलि जाहीं राम बसहु तिन्ह के मन माहीं
Verse 6
मंत्रराजु नित जपहिं तुम्हारा पूजहिं तुम्हहि सहित परिवारा
Verse 7
तरपन होम करहिं बिधि नाना बिप्र जेवाँइ देहिं बहु दाना
Verse 8
तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी सकल भायँ सेवहिं सनमानी
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