Book 2 • Chapter 135
Section 135
10 verses
Verse 1
यह सुधि कोल किरातन्ह पाई हरषे जनु नव निधि घर आई
Verse 2
कंद मूल फल भरि भरि दोना चले रंक जनु लूटन सोना
Verse 3
तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता अपर तिन्हहि पूँछहि मगु जाता
Verse 4
कहत सुनत रघुबीर निकाई आइ सबन्हि देखे रघुराई
Verse 5
करहिं जोहारु भेंट धरि आगे प्रभुहि बिलोकहिं अति अनुरागे
Verse 6
चित्र लिखे जनु जहँ तहँ ठाढ़े पुलक सरीर नयन जल बाढ़े
Verse 7
राम सनेह मगन सब जाने कहि प्रिय बचन सकल सनमाने
Verse 8
प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी बचन बिनीत कहहिं कर जोरी
Verse 9
अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय
Verse 10
भाग हमारे आगमनु राउर कोसलराय
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