Book 2 • Chapter 14
Section 14
10 verses
Verse 1
कत सिख देइ हमहि कोउ माई गालु करब केहि कर बलु पाई
Verse 2
रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू जेहि जनेसु देइ जुबराजू
Verse 3
भयउ कौसिलहि बिधि अति दाहिन देखत गरब रहत उर नाहिन
Verse 4
देखेहु कस न जाइ सब सोभा जो अवलोकि मोर मनु छोभा
Verse 5
पूतु बिदेस न सोचु तुम्हारें जानति हहु बस नाहु हमारें
Verse 6
नीद बहुत प्रिय सेज तुराई लखहु न भूप कपट चतुराई
Verse 7
सुनि प्रिय बचन मलिन मनु जानी झुकी रानि अब रहु अरगानी
Verse 8
पुनि अस कबहुँ कहसि घरफोरी तब धरि जीभ कढ़ावउँ तोरी
Verse 9
काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि
Verse 10
तिय बिसेषि पुनि चेरि कहि भरतमातु मुसुकानि
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