Book 2 • Chapter 142
Section 142
10 verses
Verse 1
जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें पलक बिलोचन गोलक जैसें
Verse 2
सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि
Verse 3
एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी खग मृग सुर तापस हितकारी
Verse 4
कहेउँ राम बन गवनु सुहावा सुनहु सुमंत्र अवध जिमि आवा
Verse 5
फिरेउ निषादु प्रभुहि पहुँचाई सचिव सहित रथ देखेसि आई
Verse 6
मंत्री बिकल बिलोकि निषादू कहि न जाइ जस भयउ बिषादू
Verse 7
राम राम सिय लखन पुकारी परेउ धरनितल ब्याकुल भारी
Verse 8
देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं जनु बिनु पंख बिहग अकुलाहीं
Verse 9
नहिं तृन चरहिं पिअहिं जलु मोचहिं लोचन बारि
Verse 10
ब्याकुल भए निषाद सब रघुबर बाजि निहारि
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