Book 2 • Chapter 146
Section 146
10 verses
Verse 1
पुछिहहिं दीन दुखित सब माता कहब काह मैं तिन्हहि बिधाता
Verse 2
पूछिहि जबहिं लखन महतारी कहिहउँ कवन सँदेस सुखारी
Verse 3
राम जननि जब आइहि धाई सुमिरि बच्छु जिमि धेनु लवाई
Verse 4
पूँछत उतरु देब मैं तेही गे बनु राम लखनु बैदेही
Verse 5
जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा
Verse 6
पूँछिहि जबहिं राउ दुख दीना जिवनु जासु रघुनाथ अधीना
Verse 7
देहउँ उतरु कौनु मुहु लाई आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई
Verse 8
सुनत लखन सिय राम सँदेसू तृन जिमि तनु परिहरिहि नरेसू
Verse 9
-ह्रदउ न बिदरेउ पंक जिमि बिछुरत प्रीतमु नीरु
Verse 10
जानत हौं मोहि दीन्ह बिधि यहु जातना सरीरु
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