Book 2 • Chapter 153
Section 153
10 verses
Verse 1
तेहि अवसर रघुबर रूख पाई केवट पारहि नाव चलाई
Verse 2
रघुकुलतिलक चले एहि भाँती देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती
Verse 3
मैं आपन किमि कहौं कलेसू जिअत फिरेउँ लेइ राम सँदेसू
Verse 4
अस कहि सचिव बचन रहि गयऊ हानि गलानि सोच बस भयऊ
Verse 5
सुत बचन सुनतहिं नरनाहू परेउ धरनि उर दारुन दाहू
Verse 6
तलफत बिषम मोह मन मापा माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा
Verse 7
करि बिलाप सब रोवहिं रानी महा बिपति किमि जाइ बखानी
Verse 8
सुनि बिलाप दुखहू दुखु लागा धीरजहू कर धीरजु भागा
Verse 9
भयउ कोलाहलु अवध अति सुनि नृप राउर सोरु
Verse 10
बिपुल बिहग बन परेउ निसि मानहुँ कुलिस कठोरु
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