Book 2 • Chapter 154
Section 154
10 verses
Verse 1
प्रान कंठगत भयउ भुआलू मनि बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू
Verse 2
इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी
Verse 3
कौसल्याँ नृपु दीख मलाना रबिकुल रबि अँथयउ जियँ जाना
Verse 4
उर धरि धीर राम महतारी बोली बचन समय अनुसारी
Verse 5
नाथ समुझि मन करिअ बिचारू राम बियोग पयोधि अपारू
Verse 6
करनधार तुम्ह अवध जहाजू चढ़ेउ सकल प्रिय पथिक समाजू
Verse 7
धीरजु धरिअ त पाइअ पारू नाहिं त बूड़िहि सबु परिवारू
Verse 8
जौं जियँ धरिअ बिनय पिय मोरी रामु लखनु सिय मिलहिं बहोरी
Verse 9
प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि
Verse 10
तलफत मीन मलीन जनु सींचत सीतल बारि
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