Book 2 • Chapter 16
Section 16
10 verses
Verse 1
एकहिं बार आस सब पूजी अब कछु कहब जीभ करि दूजी
Verse 2
फोरै जोगु कपारु अभागा भलेउ कहत दुख रउरेहि लागा
Verse 3
कहहिं झूठि फुरि बात बनाई ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई
Verse 4
हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती नाहिं त मौन रहब दिनु राती
Verse 5
करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा
Verse 6
कोउ नृप होउ हमहि का हानी चेरि छाड़ि अब होब कि रानी
Verse 7
जारै जोगु सुभाउ हमारा अनभल देखि न जाइ तुम्हारा
Verse 8
तातें कछुक बात अनुसारी छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी
Verse 9
गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि
Verse 10
सुरमाया बस बैरिनिहि सुह्द जानि पतिआनि
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