Book 2 • Chapter 166
Section 166
10 verses
Verse 1
मुख प्रसन्न मन रंग न रोषू सब कर सब बिधि करि परितोषू
Verse 2
चले बिपिन सुनि सिय सँग लागी रहइ न राम चरन अनुरागी
Verse 3
सुनतहिं लखनु चले उठि साथा रहहिं न जतन किए रघुनाथा
Verse 4
तब रघुपति सबही सिरु नाई चले संग सिय अरु लघु भाई
Verse 5
रामु लखनु सिय बनहि सिधाए गइउँ न संग न प्रान पठाए
Verse 6
यहु सबु भा इन्ह आँखिन्ह आगें तउ न तजा तनु जीव अभागें
Verse 7
मोहि न लाज निज नेहु निहारी राम सरिस सुत मैं महतारी
Verse 8
जिऐ मरै भल भूपति जाना मोर हृदय सत कुलिस समाना
Verse 9
कौसल्या के बचन सुनि भरत सहित रनिवास
Verse 10
ब्याकुल बिलपत राजगृह मानहुँ सोक नेवासु
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