Book 2 • Chapter 170
Section 170
10 verses
Verse 1
नृपतनु बेद बिदित अन्हवावा परम बिचित्र बिमानु बनावा
Verse 2
गहि पद भरत मातु सब राखी रहीं रानि दरसन अभिलाषी
Verse 3
चंदन अगर भार बहु आए अमित अनेक सुगंध सुहाए
Verse 4
सरजु तीर रचि चिता बनाई जनु सुरपुर सोपान सुहाई
Verse 5
एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही
Verse 6
सोधि सुमृति सब बेद पुराना कीन्ह भरत दसगात बिधाना
Verse 7
जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा
Verse 8
भए बिसुद्ध दिए सब दाना धेनु बाजि गज बाहन नाना
Verse 9
सिंघासन भूषन बसन अन्न धरनि धन धाम
Verse 10
दिए भरत लहि भूमिसुर भे परिपूरन काम
0:000:00
Speed: