Book 2 • Chapter 186
Section 186
10 verses
Verse 1
घर घर साजहिं बाहन नाना हरषु हृदयँ परभात पयाना
Verse 2
भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू नगरु बाजि गज भवन भँडारू
Verse 3
संपति सब रघुपति कै आही जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही
Verse 4
तौ परिनाम न मोरि भलाई पाप सिरोमनि साइँ दोहाई
Verse 5
करइ स्वामि हित सेवकु सोई दूषन कोटि देइ किन कोई
Verse 6
अस बिचारि सुचि सेवक बोले जे सपनेहुँ निज धरम न डोले
Verse 7
कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा जो जेहि लायक सो तेहिं राखा
Verse 8
करि सबु जतनु राखि रखवारे राम मातु पहिं भरतु सिधारे
Verse 9
आरत जननी जानि सब भरत सनेह सुजान
Verse 10
कहेउ बनावन पालकीं सजन सुखासन जान
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