Book 2 • Chapter 187
Section 187
10 verses
Verse 1
चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी चहत प्रात उर आरत भारी
Verse 2
जागत सब निसि भयउ बिहाना भरत बोलाए सचिव सुजाना
Verse 3
कहेउ लेहु सबु तिलक समाजू बनहिं देब मुनि रामहिं राजू
Verse 4
बेगि चलहु सुनि सचिव जोहारे तुरत तुरग रथ नाग सँवारे
Verse 5
अरुंधती अरु अगिनि समाऊ रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ
Verse 6
बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना चले सकल तप तेज निधाना
Verse 7
नगर लोग सब सजि सजि जाना चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना
Verse 8
सिबिका सुभग न जाहिं बखानी चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी
Verse 9
सौंपि नगर सुचि सेवकनि सादर सकल चलाइ
Verse 10
सुमिरि राम सिय चरन तब चले भरत दोउ भाइ
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