Book 2 • Chapter 19
Section 19
10 verses
Verse 1
भावी बस प्रतीति उर आई पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई
Verse 2
का पूछहुँ तुम्ह अबहुँ न जाना निज हित अनहित पसु पहिचाना
Verse 3
भयउ पाखु दिन सजत समाजू तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू
Verse 4
खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें सत्य कहें नहिं दोषु हमारें
Verse 5
जौं असत्य कछु कहब बनाई तौ बिधि देइहि हमहि सजाई
Verse 6
रामहि तिलक कालि जौं भयऊ तुम्ह कहुँ बिपति बीजु बिधि बयऊ
Verse 7
रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी भामिनि भइहु दूध कइ माखी
Verse 8
जौं सुत सहित करहु सेवकाई तौ घर रहहु न आन उपाई
Verse 9
कद्रूँ बिनतहि दीन्ह दुखु तुम्हहि कौसिलाँ देब
Verse 10
भरतु बंदिगृह सेइहहिं लखनु राम के नेब
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