Book 2 • Chapter 20
Section 20
9 verses
Verse 1
कैकयसुता सुनत कटु बानी कहि न सकइ कछु सहमि सुखानी
Verse 2
तन पसेउ कदली जिमि काँपी कुबरीं दसन जीभ तब चाँपी
Verse 3
कहि कहि कोटिक कपट कहानी धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी
Verse 4
फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली बकिहि सराहइ मानि मराली
Verse 5
सुनु मंथरा बात फुरि तोरी दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी
Verse 6
दिन प्रति देखउँ राति कुसपने कहउँ न तोहि मोह बस अपने
Verse 7
काह करौ सखि सूध सुभाऊ दाहिन बाम न जानउँ काऊ
Verse 8
अपने चलत न आजु लगि अनभल काहुक कीन्ह
Verse 9
केहिं अघ एकहि बार मोहि दैअँ दुसह दुखु दीन्ह
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