Book 2 • Chapter 21
Section 21
10 verses
Verse 1
नैहर जनमु भरब बरु जाइ जिअत न करबि सवति सेवकाई
Verse 2
अरि बस दैउ जिआवत जाही मरनु नीक तेहि जीवन चाही
Verse 3
दीन बचन कह बहुबिधि रानी सुनि कुबरीं तियमाया ठानी
Verse 4
अस कस कहहु मानि मन ऊना सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना
Verse 5
जेहिं राउर अति अनभल ताका सोइ पाइहि यहु फलु परिपाका
Verse 6
जब तें कुमत सुना मैं स्वामिनि भूख न बासर नींद न जामिनि
Verse 7
पूँछेउ गुनिन्ह रेख तिन्ह खाँची भरत भुआल होहिं यह साँची
Verse 8
भामिनि करहु त कहौं उपाऊ है तुम्हरीं सेवा बस राऊ
Verse 9
परउँ कूप तुअ बचन पर सकउँ पूत पति त्यागि
Verse 10
कहसि मोर दुखु देखि बड़ कस न करब हित लागि
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