Book 2 • Chapter 22
Section 22
10 verses
Verse 1
कुबरीं करि कबुली कैकेई कपट छुरी उर पाहन टेई
Verse 2
लखइ न रानि निकट दुखु कैंसे चरइ हरित तिन बलिपसु जैसें
Verse 3
सुनत बात मृदु अंत कठोरी देति मनहुँ मधु माहुर घोरी
Verse 4
कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाही स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीं
Verse 5
दुइ बरदान भूप सन थाती मागहु आजु जुड़ावहु छाती
Verse 6
सुतहि राजु रामहि बनवासू देहु लेहु सब सवति हुलासु
Verse 7
भूपति राम सपथ जब करई तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई
Verse 8
होइ अकाजु आजु निसि बीतें बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें
Verse 9
बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु
Verse 10
काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु
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