Book 2 • Chapter 190
Section 190
10 verses
Verse 1
होहु सँजोइल रोकहु घाटा ठाटहु सकल मरै के ठाटा
Verse 2
सनमुख लोह भरत सन लेऊँ जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ
Verse 3
समर मरनु पुनि सुरसरि तीरा राम काजु छनभंगु सरीरा
Verse 4
भरत भाइ नृपु मै जन नीचू बड़ें भाग असि पाइअ मीचू
Verse 5
स्वामि काज करिहउँ रन रारी जस धवलिहउँ भुवन दस चारी
Verse 6
तजउँ प्रान रघुनाथ निहोरें दुहूँ हाथ मुद मोदक मोरें
Verse 7
साधु समाज न जाकर लेखा राम भगत महुँ जासु न रेखा
Verse 8
जायँ जिअत जग सो महि भारू जननी जौबन बिटप कुठारू
Verse 9
बिगत बिषाद निषादपति सबहि बढ़ाइ उछाहु
Verse 10
सुमिरि राम मागेउ तुरत तरकस धनुष सनाहु
0:000:00
Speed: