Book 2 • Chapter 192
Section 192
10 verses
Verse 1
राम प्रताप नाथ बल तोरे करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे
Verse 2
जीवत पाउ न पाछें धरहीं रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं
Verse 3
दीख निषादनाथ भल टोलू कहेउ बजाउ जुझाऊ ढोलू
Verse 4
एतना कहत छींक भइ बाँए कहेउ सगुनिअन्ह खेत सुहाए
Verse 5
बूढ़ु एकु कह सगुन बिचारी भरतहि मिलिअ न होइहि रारी
Verse 6
रामहि भरतु मनावन जाहीं सगुन कहइ अस बिग्रहु नाहीं
Verse 7
सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा
Verse 8
भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें
Verse 9
गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ
Verse 10
बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ
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