Book 2 • Chapter 198
Section 198
10 verses
Verse 1
जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा भरत सोधु सबही कर लीन्हा
Verse 2
सुर सेवा करि आयसु पाई राम मातु पहिं गे दोउ भाई
Verse 3
चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी जननीं सकल भरत सनमानी
Verse 4
भाइहि सौंपि मातु सेवकाई आपु निषादहि लीन्ह बोलाई
Verse 5
चले सखा कर सों कर जोरें सिथिल सरीर सनेह न थोरें
Verse 6
पूँछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ
Verse 7
जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए कहत भरे जल लोचन कोए
Verse 8
भरत बचन सुनि भयउ बिषादू तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू
Verse 9
जहँ सिंसुपा पुनीत तर रघुबर किय बिश्रामु
Verse 10
अति सनेहँ सादर भरत कीन्हेउ दंड प्रनामु
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