Book 2 • Chapter 199
Section 199
10 verses
Verse 1
कुस साँथरीनिहारि सुहाई कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई
Verse 2
चरन रेख रज आँखिन्ह लाई बनइ न कहत प्रीति अधिकाई
Verse 3
कनक बिंदु दुइ चारिक देखे राखे सीस सीय सम लेखे
Verse 4
सजल बिलोचन हृदयँ गलानी कहत सखा सन बचन सुबानी
Verse 5
श्रीहत सीय बिरहँ दुतिहीना जथा अवध नर नारि बिलीना
Verse 6
पिता जनक देउँ पटतर केही करतल भोगु जोगु जग जेही
Verse 7
ससुर भानुकुल भानु भुआलू जेहि सिहात अमरावतिपालू
Verse 8
प्राननाथु रघुनाथ गोसाई जो बड़ होत सो राम बड़ाई
Verse 9
पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि
Verse 10
बिहरत ह्रदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि
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