Book 2 • Chapter 200
Section 200
10 verses
Verse 1
लालन जोगु लखन लघु लोने भे न भाइ अस अहहिं न होने
Verse 2
पुरजन प्रिय पितु मातु दुलारे सिय रघुबरहि प्रानपिआरे
Verse 3
मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ तात बाउ तन लाग न काऊ
Verse 4
ते बन सहहिं बिपति सब भाँती निदरे कोटि कुलिस एहिं छाती
Verse 5
राम जनमि जगु कीन्ह उजागर रूप सील सुख सब गुन सागर
Verse 6
पुरजन परिजन गुर पितु माता राम सुभाउ सबहि सुखदाता
Verse 7
बैरिउ राम बड़ाई करहीं बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीं
Verse 8
सारद कोटि कोटि सत सेषा करि न सकहिं प्रभु गुन गन लेखा
Verse 9
सुखस्वरुप रघुबंसमनि मंगल मोद निधान
Verse 10
ते सोवत कुस डासि महि बिधि गति अति बलवान
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