Book 2 • Chapter 201
Section 201
8 verses
Verse 1
राम सुना दुखु कान न काऊ जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ
Verse 2
पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती जोगवहिं जननि सकल दिन राती
Verse 3
ते अब फिरत बिपिन पदचारी कंद मूल फल फूल अहारी
Verse 4
धिग कैकेई अमंगल मूला भइसि प्रान प्रियतम प्रतिकूला
Verse 5
मैं धिग धिग अघ उदधि अभागी सबु उतपातु भयउ जेहि लागी
Verse 6
कुल कलंकु करि सृजेउ बिधाताँ साइँदोह मोहि कीन्ह कुमाताँ
Verse 7
सुनि सप्रेम समुझाव निषादू नाथ करिअ कत बादि बिषादू
Verse 8
राम तुम्हहि प्रिय तुम्ह प्रिय रामहि यह निरजोसु दोसु बिधि बामहि
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