Book 2 • Chapter 202
Section 202
11 verses
Verse 1
सखा बचन सुनि उर धरि धीरा बास चले सुमिरत रघुबीरा
Verse 2
यह सुधि पाइ नगर नर नारी चले बिलोकन आरत भारी
Verse 3
परदखिना करि करहिं प्रनामा देहिं कैकइहि खोरि निकामा
Verse 4
भरी भरि बारि बिलोचन लेंहीं बाम बिधाताहि दूषन देहीं
Verse 5
एक सराहहिं भरत सनेहू कोउ कह नृपति निबाहेउ नेहू
Verse 6
निंदहिं आपु सराहि निषादहि को कहि सकइ बिमोह बिषादहि
Verse 7
एहि बिधि राति लोगु सबु जागा भा भिनुसार गुदारा लागा
Verse 8
गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं नईं नाव सब मातु चढ़ाईं
Verse 9
दंड चारि महँ भा सबु पारा उतरि भरत तब सबहि सँभारा
Verse 10
प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ
Verse 11
आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ
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