Book 2 • Chapter 24
Section 24
10 verses
Verse 1
बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं
Verse 2
प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी
Verse 3
फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई करत परसपर राम बड़ाई
Verse 4
को रघुबीर सरिस संसारा सीलु सनेह निबाहनिहारा
Verse 5
जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं
Verse 6
सेवक हम स्वामी सियनाहू होउ नात यह ओर निबाहू
Verse 7
अस अभिलाषु नगर सब काहू कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू
Verse 8
को न कुसंगति पाइ नसाई रहइ न नीच मतें चतुराई
Verse 9
साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ
Verse 10
गवनु निठुरता निकट किय जनु धरि देह सनेहँ
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